सिंडिकेट ने युवाओं को फंसाया, प्रशासन बेखबर
दैनिक सूत्रों की आवाज / नवनीत सिंह बक्शी/ पिपरिया**
पिपरिया और आसपास के क्षेत्रों में नशे का कारोबार अब सामाजिक आपदा का रूप ले चुका है। खासकर स्मैक का संगठित नेटवर्क यहां तेजी से पैर पसार चुका है। यह सिंडिकेट पिपरिया से लेकर गाडरवारा और भोपाल तक फैला हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस धंधे में खुद युवा ही सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और अपने साथ अन्य युवाओं को भी लत की दलदल में धकेल रहे हैं।
### हर गली-कूचे में सक्रिय नेटवर्क
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि स्मैक की पुड़िया 24 घंटे उपलब्ध रहती है। हथवांस, लकड़ी के टाल, राम जानकी मंदिर क्षेत्र और अन्य चिन्हित स्थानों पर इसका कारोबार खुलेआम होता है। तीन-चार युवक लगातार घूमकर ग्राहकों की पहचान करते हैं और तय जगह पर पुड़िया उपलब्ध कराते हैं। लेन-देन नकद के अलावा ऑनलाइन पेमेंट से भी होता है। कुछ चाय की दुकानों को आड़ बनाकर यह कारोबार चलता है। इस सुनियोजित व्यवस्था से साफ है कि यह धंधा बेहद संगठित और मजबूत पकड़ के साथ चल रहा है।
### पुलिस की कार्रवाई केवल प्यादों तक
बीते दिनों पुलिस ने एक अड्डे पर छापा मारकर कुछ युवकों को पकड़ा भी था, लेकिन बड़े कारोबारियों तक हाथ नहीं पहुंच सका। यही वजह है कि धंधेबाज बेखौफ होकर कारोबार जारी रखे हुए हैं। जानकारों के मुताबिक, स्मैक कारोबार से भारी कमाई हो रही है। पिछले दो साल में कई लोग अचानक संपत्ति खड़ी कर चुके हैं। मकान, दुकान और गाड़ियां सब कुछ इसी अवैध धंधे से हासिल किया गया है।
### कैमरे से निगरानी और गुप्त लेन-देन
सूत्र बताते हैं कि कारोबारी ग्राहकों की पहचान कैमरे से करने के बाद ही पुड़िया उपलब्ध कराते हैं, ताकि पकड़े जाने का खतरा कम रहे। यही वजह है कि पुलिस की कोशिशें बड़े स्तर पर विफल हो रही हैं। प्रशासन की नजर सिर्फ छोटे आरोपियों तक ही सीमित रह गई है, जबकि असली मास्टरमाइंड बेखौफ कारोबार चला रहे हैं।
### कीमत और उपलब्धता
स्थानीय निवासियों के अनुसार, शाम ढलते ही हथवांस रोड का इलाका सक्रिय हो जाता है। महज 500 से 700 रुपये में स्मैक की पुड़िया आसानी से मिल जाती है। यही वजह है कि नशे की गिरफ्त में आ रहे युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
### समाज में गहराती चिंता
खुलेआम हो रहे इस व्यापार ने क्षेत्रवासियों में भारी चिंता पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में हालात और भयावह हो जाएंगे।
### समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी
क्षेत्र के सामाजिक संगठन और नागरिक प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि केवल छोटे आरोपियों तक कार्रवाई सीमित करने के बजाय पूरे सिंडिकेट को तोड़ा जाए। बड़े कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई हो और युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए।
### अब नहीं तो कभी नहीं
यह समस्या सिर्फ प्रशासन की नहीं बल्कि पूरे समाज की है। यदि परिवार, समाज और शासन मिलकर संगठित कदम नहीं उठाते तो आने वाली पीढ़ी को इस जहरीले जाल से बचाना मुश्किल होगा। पिपरिया और आसपास के क्षेत्रों में नशे के इस बढ़ते कारोबार को रोकने के लिए अब निर्णायक अभियान चलाना बेहद जरूरी है।
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