Monday, March 2, 2026
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का भव्य आयोजन

दिनांक 10 अक्टूबर 2025 को शहीद भगत सिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पिपरिया में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ, विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ एवं मेंटल हेल्थ सेल के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव महेश्वरी के स्वागत भाषण एवं माँ सरस्वती के दीप प्रज्वलन से हुआ। अपने स्वागत संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है और इसका संतुलन बनाए रखना आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

प्राचार्य के उद्बोधन के पश्चात डॉ. अनीता सेन ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस क्यों मनाया जाता है इस पर विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।

इसके पश्चात कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. फरीन हुसैन मानसिक परामर्श दाता ने मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि “मनुष्य का अवचेतन मन (Subconscious Mind) उसकी वास्तविक सोच और व्यवहार को नियंत्रित करता है।” उन्होंने समझाया कि हमारे अवचेतन विचार हमारे निर्णयों, भावनाओं और जीवनशैली को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। उन्होंने भावनात्मक नियंत्रण (Emotional Control) और तनाव प्रबंधन (Stress Management) के व्यावहारिक उपाय जैसे सकारात्मक सोच, ध्यान, आत्मसंवाद, और नियमित जीवनशैली अपनाना बताएं।

दूसरे वक्ता श्री आनंद सोडानी ने अत्यंत प्रायोगिक शैली में कहा कि “यदि श्वास सही है तो जीवन सही है।” उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि सही श्वास-प्रश्वास की प्रक्रिया मन और शरीर दोनों को शांत रखती है। उन्होंने योग एवं प्राणायाम के माध्यम से तनाव, अनिद्रा और विचारों की अधिकता से निपटने के आसान उपाय बताए। उनके सत्र ने विद्यार्थियों को यह समझाया कि योग केवल शारीरिक क्रिया नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का सबसे सशक्त साधन है।

तीसरे वक्ता श्री राजेन्द्र पचौरी ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा कि “चंद्रमा रूपी मन को नियंत्रित करना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है।” उन्होंने समझाया कि मन की प्रकृति चंचल होती है, परंतु सत्संग, संयम, आत्मचिंतन और ध्यान के माध्यम से इसे स्थिर किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया — “अपने विचारों पर निगरानी रखें, क्योंकि विचार ही कर्म बनते हैं और कर्म ही व्यक्तित्व।”

इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकगण डॉ. एस.के. मेहरा, प्रो. ए.के. राकेसिया, डॉ. अम्बिका सिंह, श्रीमती कविता नामदेव, डॉ. अरुण मोहता, श्री नंदलाल अहिरवार, , श्री अतुल शर्मा, , सुश्री वीणा सनोदिया, श्री सौरभ सिंह, ,डॉ मुकेश कटकवार श्री आमिर सईद सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी श्री महेंद्र कुमार चौकसे द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. एल.एन. मालवीय ने किया।

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