गाडरवारा| शिक्षक दिवस के अवसर पर स्थानीय नई गल्ला मंडी प्रांगण में हीरा ज्वेलर्स के जिनेश जैन एवं सज़ल जैन के तत्वाधान में वृहद शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन जगदगुरू शंकराचार्य के परम शिष्य ब्रम्हचारी ब्रम्ह विद्यानंद जी महाराज एवं ब्रम्हचारी अचलानंद जी महाराज, जैन साध्वी दीदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया । इस कार्यक्रम में विधायक जुन्नारदेव सुनील उइके एवं पूर्व विधायक सुनीता पटैल अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे । मंच पर 21 सेवानिवृत शिक्षकों की पावन उपस्थिति थी ।जिनमें वरिष्ठ प्रोफेसर यूडी शर्मा, डॉ ए. के. जैन, श्रीमती संध्या गुप्ता, श्रीमती डॉ. ममता सिंह, मायाशंकर जायसवाल, आरती पाठक, मुमताज खान, कमलेश वर्मा, छत्रसाल साहू, मनोहरलाल आरसे, अन्नीलाल शर्मा, श्रीमती कमला नगरिया, रामशंकर चौरसिया, मानक लाल कौरव, श्रीमती लीलावती गुप्ता, श्रीमती चित्रा पांडे, श्रीमती निर्मला सराठे, अनंत पटैल, श्रीमती शीला वर्मा, अखिलेश दुबे शामिल थे । कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्ति वाचन पं. विश्वनाथ दुबे, पं उमाकांत पचौरी, पं कमलेश दूरबार, पं. अवशेष दुबे द्वारा तथा प्रथम पूज्य गणेशजी, मॉ सरस्वती और सर्वपल्ली राधाकृष्णनन के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ । शासकीय कन्या शाला की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना नृत्य के रूप में प्राची वंशकार, रोशनी विश्नोई, प्रतिज्ञा छीपा, सुहानी केवट, अंशिका सलोनी, मालवीय, पूजा केवट, निधि जाटव और आकांक्षा जाटव द्वारा प्रस्तुत की गई ।


कार्यक्रम के आयोजक जिनेश जैन एवं राशी जैन ने महाराज श्री की पादुका पूजन कर आशीर्वाद ग्रहण किया तदोपरांत मंचासीन अतिथियों का स्वागत तिलक लगाकर एवं फूल माला से किया गया । मंगलाचरण श्रीमती मोनिका जैन एवं पल्लवी जैन ने प्रस्तुत किया । शिक्षकों के जीवन की कठिनाईयों को प्रदर्शित करती एक भाव पूर्ण डाक्यूमेन्ट्री जिसे विजय नामदेव और पवन स्टूडियों के संयुक्त प्रयास के बनाया गया का प्रदर्शन किया गया । कार्यक्रम के आयोजक जिनेश जैन ने अपने कृतज्ञता उद्बोधन में प्रांगण में उपस्थित लगभग तीन हजार शिक्षकों का शाब्दिक स्वागत करते हुए कहा कि गुरू के ऋण से मुक्त कभी नहीं हुआ जा सकता है । हमारा सौभाग्य ही है कि हम गुरूतुल्य शिक्षकों का सम्मान कर पा रहे हैं । अपने स्वागत भाषण में सजल जैन ने कहा कि गुरूशिष्य परंपरा सदियों पुरानी है हम इस परंपरा को आगें बढ़ाने के लिए कृत संकल्पित हैंं । वरिष्ठ साहित्यकार कुंशलेन्द्र श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में गाडरवारा क्षेत्र के महान शिक्षकों को याद करते हुए कहा कि विद्या से बड़ा कोई धन नहीं होता । शिक्षा जीवन को नया रूप देती है । आचार्य श्री108 विद्यासागर आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज की परम शिष्या जबलुपर प्रतिभा स्थली से पधारीं ब्रह्मचारी दीदी ने अपने ओजपूर्ण भाषण में शिक्षकों और शिक्षा के महत्व को बताते हुए कहा कि संस्कार और संस्कृति का ज्ञान हमें शिक्षा से ही प्राप्त होता है । जीवन मूल्यों को उंचाई केवल ज्ञान से ही प्राप्त की जा सकती है, अनुशासन, कत्वर्यनिष्ठा जैसे गुण शिक्षा से ही प्राप्त किए जा सकते हैं । इस अवसर पर ब्रम्हचारी ब्रम्ह विद्यानंद जी महाराज ने कहा हमारे देश में गुरूकुल परंपरा सदियों पुरानी है जो सार्वगीण शिक्षा का केन्द्र हुआ करती थी कलांतर में इसका ही रूप परिवर्तन हुआ है । शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान का ही नाम है, सर्वागीण शिक्षा जीवन के विकास के लिए आवश्यक होती है । पूर्व विधायक श्रीमती सुनीता पटैल के कहा कि मनुष्य का जीवन शिक्षा के बिना अधूरा होता है । बचपन में दी गई शिक्षा उसे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेने में सहयोग करती है । विधायक सुनील उइके ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाते हैं । मुझे इस कार्यक्रम से प्रेरणा मिली है कि ऐसा कार्यक्रम मैं भी अपने क्षेत्र में करूं।कार्यक्रम में नवोदय विद्यालय के बच्चों द्वारा अपनी प्रस्तुति दी गई इस अवसर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य डा. अरूण तिवारी भी उपस्थित रहे । वहीं श्रीमती रेखा राय के संयोजन में मनमोहक आदिवासी नृत्य भी प्रस्तुत किया । कार्यक्रम में साईखेड़ा, चीचली और चांवरपाठा विकास खंड तेदूखेडा उदयपुरा से पधारे शिक्षकों का सम्मान तिलक, शाल और स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया गया ।।काय्रक्रम का संचालन सत्यप्रकाश बसेड़िया ने किया और आभार प्रदर्शन प्राजंल जैन ने किया। कार्यक्रम में समिति सदस्यों सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे

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