पिपरिया की धरा पर अनेक नाम हैं, परंतु उनमें से एक ऐसा नाम है जो आज समर्पण, सेवा और शिक्षा का प्रतीक बन चुका है— अमित श्रीवास्तव।
शासकीय कन्या प्राथमिक शाला खापरखेड़ा में कार्यरत श्रीवास्तव जी ने अपने कर्म और संकल्प से यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा शिक्षक केवल किताबों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों के भविष्य को गढ़ने का माध्यम बनता है।
विद्यालय को निरंतर अपडेट रखना, बच्चियों को श्रेष्ठ शिक्षा देना और उन्हें आधुनिक युग की तकनीक से जोड़ना—इन सभी जिम्मेदारियों को उन्होंने अपने कंधों पर लिया।
स्वयं के प्रयासों से कंप्यूटर की व्यवस्था कर उन्होंने इस छोटे से स्कूल को आज निजी विद्यालयों की कतार में खड़ा कर दिया।
केवल शिक्षा ही नहीं, समाज और धर्म के हर कार्य में उनकी भागीदारी उल्लेखनीय रही है। कोरोना जैसे कठिन समय में भी उन्होंने मानवता की सेवा को अपना धर्म मानकर समाज के लिए बढ़-चढ़कर योगदान दिया।
ऐसे यशस्वी शिक्षक, जिनके कार्य से शिक्षा का दीप और अधिक प्रज्वलित होता है, उन्हें शिक्षक दिवस एवं उनके जन्मदिवस पर हृदय से शुभकामनाएँ और नमन। 🌹
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