– जंगल के बाहर बढ़ी लाल गिलहरी की संख्या
अभिषेक श्रोती, पचमढ़ी। पचमढ़ी के जंगल में दिखने वाली मालाबार रेड जायंट स्क्विरल अपने सिंदूरी लाल रंग और लंबी छलांग के कारण पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. पचमढ़ी के 50 से अधिक स्थानों पर यह विशाल लाल गिलहरी पेड़ों पर आसानी से दिख रही है. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों की माने तो कुछ साल पहले तक पचमढ़ी के गिने चुने स्थान पर दुर्लभ लाल गिलहरी कभी कभार दिखती थी, लेकिन अब करीब 300 से अधिक की संख्या में यह दिख रही है. पचमढ़ी के जंगल में भी बड़ी संख्या में मालाबार रेड जायंट स्क्विरल की संख्या बढ़ गई है, जो यहां की समृद्ध जैव-विविधता को दर्शाता है.
रंग बिरंगी खाल करती है आकर्षित
मालाबार रेड जायंट स्क्विरल की रंग-बिरंगी खाल आकर्षक दिखती है. इसका रंग लाल, सिंदूरी, बैंगनी-भूरा और काला मिश्रित होता है. साधारण गिलहरी से इसका रंग अलग होता है. यह दिखने में बड़ी होती. इसके कारण पहली बार देखने वाला व्यक्ति इसे दूसरा वन जीव समझ लेता है. नजदीक से देखने पर पर्यटक इसे देख कर आकर्षित होते हैं. शरीर पर नारंगी रंग होने के कारण पर्यटक इसे सिंदूरी गिलहरी भी कहने लगे हैं.
साधारण गिलहरी से होती है बड़ी
रेड जायंट स्क्विरल साधारण गिलहरी से अधिक बड़ी होती है. साधारण गिलहरी की लंबाई 20 से 25 सेंटीमीटर होती है तो वही इस लंबाई करीब 90-100 सेंटीमीटर तक और पूंछ शरीर जितनी ही लंबी होती है. इसकी लंबी, घनी पूंछ संतुलन बनाए रखने और छलांग लगाने में मदद करती है. यह गिलहरी मुख्य रूप से फलों, फूलों और पत्तियों पर निर्भर रहती है और पेड़ों की शाखाओं पर 20 फीट तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम है. अपनी लंबी छलांग के कारण क्षेत्र में उड़ने वाली गिलहरी के नाम से प्रसिद्ध है. लाल गिलहरी का वजन डेढ़ से 2 किलो तक होता है. पेड़ों की ऊंची शाखाओं पर रहने की आदत इसे और भी खास बनाती है. यह पेड़ों पर अकेले घोंसला बना कर रहती है.
क्यों कहते हैं मालाबार गिलहरी
लाल गिलहरी को बोलचाल में “रेड जायंट स्क्विरल” या “मालाबार स्क्विरल” भी कहते हैं. भारत के पश्चिमी तटीय इलाक़े (केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र का हिस्सा) ऐतिहासिक रूप से “मालाबार क्षेत्र” कहलाते हैं. यह गिलहरी मुख्य रूप से पश्चिमी घाट (यानी मालाबार क्षेत्र) में पाई जाती है, इसलिए इसका नाम “मालाबर ” पड़ा. यही कारण है कि पश्चिमी घाट के अलावा भी इसे मालाबार स्क्विरल कहा जाता है.
पर्यटक कहते हैं सिंदूरी गिलहरी
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के गाइड मुरली शुक्ला बताते हैं की हम यहां आने वाले पर्यटकों को पचमढ़ी के कई स्थानों पर पाई जाने वाली लाल बड़ी गिलहरी जरूर दिखाते हैं। यह दुर्लभ गिलहरी उन्हें आकर्षित करती है. उसकी उछल कूद देखने के लिए पर्यटक घंटों पेड़ों के आसपास खड़े रहते हैं. पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इसकी चर्चा और दर्शन से यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में इज़ाफ़ा होगा.
लाल बड़ी गिलहरी सतपुड़ा की पहचान
“सतपुड़ा के घने, सदाबहार और पर्णपाती जंगल दुर्लभ लाल बड़ी गिलहरी का घर हैं. यही कारण है कि यह दुर्लभ गिलहरी सतपुड़ा की पहचान है. पिछले कुछ समय से पचमढ़ी के जंगल के बाहर भी उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है.”
संजीव शर्मा, सहायक संचालक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व पचमढ़ी
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